जिले के बारे में

वर्तमान बक्सर जिले के अंतर्गत बक्सर सदर और पुराने भोजपुर जिला के डुमराव अनुमंडल में आता है | यह जिला 1991 में अस्तित्व में आया | बक्सर शहर जिला का मुख्यालय है | साथ ही जिले का मुख्य शहर भी | यह जिला के उत्तर में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से, दक्षिण में रोहतास जिले एवं पश्चिम में उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले एवं पूर्व में भोजपुर जिले से सटा हुआ है |

बक्सर जिला में 2 अनुमंडल एवं 11 प्रखंड है | इन 11 प्रखंडों में से 7 प्रखंड डुमरांव अनुमंडल में एवं चार प्रखंड सदर अनुमंडल में है | बक्सर एवं डुमराव अनुमंडलो में एक-एक शहर है | सभी प्रखंड एवं शहर निम्नलिखित अनुमंडलों में स्थित है:-

अनुमंडल का नाम प्रखंड का नाम शहर का नाम
बक्सर बक्सर
इटाढ़ी
राजपूर
चौसा
बक्सर नगर परिषद
डुमराव डुमराव
नावानगर
ब्रहमपुर
केसठ
चक्की
चौगाई
सिमरी
डुमरांव नगर परिषद

 

भौगोलिक विवरण

बक्सर जिले में दो अनुमंडल है यथा बक्सर एवं डुमरांव, जो कि 162380 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत है | संपूर्ण भूमि पटल उत्तर में गंगा नदी एवं दक्षिण में उत्तर मध्य रेलवे के मध्य में है, यह एक निम्न एवं समतल मृदा का भूमि है | यह क्षेत्र राज्य में गेहूं उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है |

जलवायु परिस्थिति

इस जिले की जलवायु मध्यम प्रकृति की है | ग्रीष्म ऋतु मार्च के मध्य से प्रारंभ होती है, जब गर्म पछुआ हवाएं दिन के समय बहना प्रारंभ होती है | अप्रैल एवं मई का महीना अत्यधिक गर्म होता है | सामान्यता मानसून जून महीने के तीसरे सप्ताह में सक्रिय होता है एवं बीच-बीच के अंतराल के साथ सितंबर महीने के अंत तक रहता है | ठंड का मौसम नवंबर के माह से प्रारंभ होकर मार्च माह के प्रारंभ तक रहता है | जनवरी सबसे ठंडा माह है, जब तापमान 10 डिग्री तक नीचे चली जाती है | अप्रैल महीने से लेकर मानसून आने तक इस जिले में कभी कभार चमक के साथ आंधी तूफान भी आता है |

वर्षापात

कभी-कभी वर्षा जून से प्रारंभ होती है, जिससे तापमान में कमी आती है और आद्रता में वृद्धि हो जाती है | इस जिले में अधिकतम वर्षा जुलाई एवं अगस्त के मध्य पड़ती है | अक्टूबर महीने में हल्की बारिश होती है, परंतु नवंबर एवं दिसंबर महीने में सूखे रहते है |

वन क्षेत्र

वनों की कटाई के कारण इस जिले का जंगल क्षेत्र बहुत कम है | इस जिले के कुछ सामान्य वृक्ष आम, शीशम, बांस एवं लंबे घासों की कुछ प्रजातियां मूँज जो कि गंगा नदी के दियरा क्षेत्र में पाए जाते है | मूँजो का प्रयोग कच्चे घरों के छत बनाने में किया जाता है |
जिले के जंगल अपने उत्पादन में समृद्ध नहीं है | जलावन हेतु लकड़ी ही मुख्य उत्पाद है | जब जंगल अधिक थे, तब इस जिले में विभिन्न जंगली जानवर एवं शिकारी पक्षी थे | अप्रवास सुविधा की वृद्धि होने से कृषि के क्षेत्र में वृद्धि हुई है | फलस्वरुप जंगल क्षेत्र में कमी हुई | इस प्रक्रिया में जंगली जानवर भी प्रभावित हुए एवं उनकी संख्या में उल्लेखनीय कमी आई | गंगा नदी के निकट मैदानों में नीलगाय एवं चितकबरे हिरण पाए जाते है | बक्सर शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में बंदर पाए जाते है | विभिन्न पक्षी जैसे तोता , तीतर, बटेर आदि इस जिले में पाए जाते है |

सिंचाई सुविधाएं

सोन एवं गंगा नदी सालो भर सतही पानी के स्रोत है | ये नदियाँ जिले के अधिकतम कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा प्रदान करती है | जमींदारी उन्मूलन के पूर्व जमींदार लोग नालों एवं पाईन का देखभाल करते थे, जिनका प्रयोग सिंचाई एवं नाली के रूप में किया जाता था | इस जिले को कृषक समृद्धि कृत्रिम सिंचाई पर निर्भर करता है, जिसके बिना खेत बिना पानी के जोत के रह जाएंगे एवं भूमि आवश्यक मात्रा में खाद्य फसल उगाने में असमर्थ हो जाएंगे जिससे यहां के लोगों का पोषण नहीं हो पाएगा | सिंचाई के तीन प्रमुख स्रोत कुएं, ताल एवं नाहर थे | ये प्राकृतिक जल आपूर्ति करते थे एवं असमय एवं अप्रचुर मात्रा में जल आपूर्ति का क्षतिपूर्ति भी करते थे | आहर वर्षा जल को इकट्ठा करने हेतु, कृत्रिम साधन थे | छिछले भूमि को छोटे-छोटे आरोहियो के द्वारा रोक कर जल इकट्ठा किया जाता था | जहां पर ऊंचे स्थान से पानी आकर जमा होते थे | इस इकट्ठे जल को विभिन्न नालो एवं आहरो से जोड़ दिया जाता था | बड़े बड़े नालों (पाइन) के देखभाल का जिम्मा भूस्वामी का रास्ता था |
फिर भी उपरोक्त कृत्रिम सिंचाई के साधन सोन नहर प्रणाली जो कि जिले में सिंचाई के प्रमुख स्रोत है, के तुलना में कम महत्व के है |
इस जिले में सिंचित एवं असिंचित दोनों क्षेत्रों का उपयोग कृषि हेतु किया जाता है | यहां तक कि कुछ बड़े जलाशय जो कि डुमराव में है और जो कि बत्तख आश्रम है का भी प्रयोग कृषि उद्देश्य के लिए किया जाता है |
चावल, गेहूं, चना एवं दाल इस जिले के मुख्य फसल है | भोजपुर के निकट कुछ क्षेत्रों में सब्जियां उगाई जाती है | यह फसल एवं सब्जियों को दूसरे जिलों में भेजा जाता है | पुआलों का प्रयोग पशु चारा एवं कच्चे घरों को छाने में किया जाता है |

खाद्यान एवं खनिज

इस जिले में खनिजों की मात्रा नगण्य है |

औद्योगीकरण

जिला बक्सर में विभिन्न प्रकार के लघु एवं कुटीर उद्योग उवस्थित है जिसका विवरण निम्नवत है:-

  • साबुन उद्योग:- यह मुख्य रूप से बक्सर एवं डुमराव शहर में सकेंद्रित है |
  • लकड़ी एवं कास्ट उद्योग:- यह मुख्य रूप से बक्सर में डुमराव शहर में स्थित है |
  • चमड़ा उद्योग:- पूरे जिले में चर्मकार है |इसका संकेंद्रण मुख्य रूप से बक्सर अनुमंडल के खिलाफतपुर गांव में है जो जूते बनाते है | यह लोग उद्योग विकास विभाग से सहयोग भी प्राप्त करते है |

जीवन यापन

बक्सर जिले बहुसंख्य निवासी कृषि कार्य में कार्यरत है एवं अपना जीवन यापन इसी से अर्जित करते है | जीवन यापन का प्रक्रिया समान्यत: सामाजिक पद निर्धारित करता है | सरकार के गंभीर प्रयास एवं कृषकों के प्रयास के फलस्वरूप लोगों के जीवन यापन के गुणवत्ता में सुधार हुआ है | चुकि जिले की अधिकतर लोग समृद्ध कृषक है एवं जिसका कारण नहर सिंचाई की सुविधा है, यह जिला पशुपालन में भी समृद्ध है | 1991 में हुए कृषि जनगणना बताता है कि जिले का पशुधन वितरण निम्नलिखित है:-
गाय 184325, भेड़ 15430, घोड़े 3341 ऊट 15 भैंस 114112 बकरियां 82186 गधे 1646 सुअर 13235 मुर्गियां 70305

संचार साधन

यह जिला लंबे समय से संडक संचार के मामले में समृद्ध रहा है | बक्सर जनरल में “फ्रांसिस बुकनन” ने कहा है कि जिले में कुछ बहुत अच्छी सड़के है उसने ईट निर्मित कुछ पुलों सहित बहुत अच्छे सड़क पर कोईलवर से बक्सर तक भ्रमण किया उसने कुछ अन्य अच्छे संडको जैसे बक्सर का बड़ा सड़क, सासाराम से वाराणसी का सड़क एवं डुमराव आरा पटना बक्सर सड़क तथा बिहिया पियरो रोड, डुमराव नासरीगंज रोड तथा सासाराम बिक्रमगंज आरा संडक का भी चर्चा किया है जो कि अच्छे रोड माने जाते थे | बक्सर जिला मुख्यालय पूर्व रेलवे के मुख्य पथ पर है | गंगा नदी बारह मास नव वाहनिया है | यहां से सामान पूर्व में कोलकाता के लिए एवं पश्चिमी में उत्तर प्रदेश के लिए जहाजों से भेजे जाते है |

ऋण सुविधाएं

इस जिले में सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक मुख्य शहरों में है जो कोआपरेटिव बैंकिंग एवं ऋण देने हेतु मुख्य भूमिका निभाते है | सभी सहयोग समितियां ऋण सुविधा हेतु इन बैंकों से जुड़े हुए है | बैंक इन सहयोग समितियों के माध्यम से इसके सदस्यों को ऋण प्रदान करते हैं | इन बैंकों के द्वारा छोटे एवं मध्यम अवधि हेतु केवल कृषि कार्य के लिए ऋण दिए जाते है | छोटी अवधि के ऋण कृषि सदस्यों के बीज, खाद्य उर्वरक आदि के लिए दिए जाते है | मध्यम अवधि के ऋण जीवन यापन के वस्तुओं की खरीद एवं कृषि उपकरण के खरीद के लिए दिए जाते है |

वाणिज्य एवं बाजार

इस जिले में महत्वपूर्ण थोक बाजार बक्सर एवं डुमराव में है | बक्सर रेलवे स्टेशन से मुक्त पदार्थ जैसे धान, गुड़, आम आदि बाहर भेजे जाते है एवं मशीन तथा यौगिक सामान बाहर से मंगाए जाते है |

बक्सर जिला शहर एवं महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र है | यहां रेलवे, रोडवेज तथा नौवाहन की सुविधा है | यह गंगा नदी के किनारे स्थित है तथा शहर का मुख्य व्यापार खाद्यान्न, सब्जियां, मछलियां एवं सेंटर जेल में उत्पादित पदार्थों का निर्यात है | आरा एवं बक्सर शहर में बहुत सारे मंदिर एवं महत्वपूर्ण विपणन केंद्र स्थित है |